Posts

Showing posts from September, 2019

भगत सिंह और उनकी अधूरी क्रांति

तो आज भगत सिंह का जन्मदिन है.. बहुत सारे लोग अपनी डीपी और स्टेटस में भगत सिंह की फ़ोटो लगाएंगे.. क्योंकि वो सोचते हैं भगतसिंह एक उग्र क्रांतिकारी थे और उन्होंने आज़ादी के लिए जान दी थी.. पर क्या सच में उन्होंने सोचा था कि फांसी पर चढ़ूंगा तो अंग्रेज़ आज़ाद कर देंगे?? देश सुखी और सम्पन्न होगा?? क्या इतना ही मकसद था उनका अपनी जान न्यौछावर करने का... नहीं .. बिल्कुल नही.. उनके फांसी पर चढ़ने का उनका मकसद आज भी अधूरा है.... आज के युवा जिनमें भगत सिंह क्रांति की आग पैदा करना चाहते थे ताकि इस देश का हित हो किसी के साथ अन्याय न हो सबको बराबरी का हक मिले.. उन युवाओं के पास TikTok पर वीडियो बनाने के लिए तो समय है..Instagram.. Facebook .. पर बेमतलब अतार्किक समाजविरोधी जनविरोधी शांतिविरोधी और उत्तेजना में लोगो को गालियां देने का तो पर्याप्त समय है पर भगतसिंह सिंह जैसे महान गंभीर विचारकों के लिए समय नही है इस ब्लॉग को भी शायद ही कोई पूरा पढ़े क्योंकि ये बहुत पकाऊ है इतिहास पर गौर करने की हिम्मत नही है क्योंकि इतिहास उनकी विचारधारा के खिलाफ भी हो सकता है जो कि पसन्द नही आएगा वो मज़ा नही देगा जो उत्तेजन...

A letter to "Bhakts"

वैसे ये कोई लेटर तो नही है पर आजकल देश मे मंदी चल रही है.. कैसी मंदी?? अरे मंदबुद्धि वाली मंदी नही.... आर्थिक मंदी चल रही है.. हालांकि बुद्धि की मंदी भी चल रही है पर उसे जाने देते हैं.. हां तो अर्थशास्त्रियों के हिसाब से अगर इसे गंभीरता से न लिया गया तो शायद देश को आने वालों समय मे आर्थिक संकटो से जूझना पड़े.. पर इसपे मुझे लिखना क्या है..दरअसल मुद्दा वो है.. आजकल कुछ भक्त (वैसे मैं भी कभी भक्त हुआ करता था) अर्थव्यवस्था पर आ रही निराशाजनक खबरों पर चिंतित है... सच कहूँ तो चिंतित तो नही है.. पर चूंकि उन्हें ये दिखाने का मौका मिल रहा है कि देखो हम गलत के खिलाफ बोलते हैं.. तो बस वही फॉर्मेलिटी अदा कर रहे हैं... वैसे ये वाक़ई भी व्यथित हो सकते हैं पर भई क्यों हो? क्योंकि 5 साल के बाद भी आपने वापस इन्हें चुना है तो अब क्या दिक्कत है.. अच्छा खुद सोचिये.... क्या आपने मोदी को वोट देश की अर्थव्यवस्था के नाम पर दिया था.. क्या इसलिए दिया था की बेरोजगारी खत्म हो .. क्या इसलिए दिया था की देश की खस्ता शिक्षा व्यवस्था सुधरे... शिक्षा का तरीका बदले स्कूली ढांचे बदले... क्या इसलिए दिया था कि अच...